LAW'S VERDICT

भोजशाला मामला: हाईकोर्ट ने कहा- ASI रिपोर्ट पहले ही अनसील, दोबारा खोलने की आवश्यकता नहीं

ASI रिपोर्ट पर 2 हफ्ते में सभी पक्षों को आपत्तियाँ, सुझाव दाखिल करने के निर्देश 

इंदौर। धार जिले की भोजशाला से जुड़े विवाद पर Archeological Survey Of India (ASI) की रिपोर्ट पर मप्र हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को आपत्तियां और सुझाव देने कहा है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीज़न बेंच ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक बार ASI की रिपोर्ट खुल चुकी है तो दोबारा उसे खोलना उचित नहीं होगा। बेंच ने सभी पक्षों को रिपोर्ट की प्रतियां उपलब्ध कराने के निर्देश देकर अगली सुनवाई 16 मार्च को तय की है। अब पक्षकारों की आपत्तियों के बाद मामले में आगे की दिशा तय होगी।

संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र था भोजशाला 

मप्र हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में यह मामला हिन्दू फ्रंट फॉर जस्टिस व अन्य की ओर से दाखिल की गई है।  याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि 1010 से 1055 ईस्वी के बीच राजा भोज द्वारा निर्मित भोजशाला नाम के इस स्थल में देवी वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर था और यह संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र था। यहां वेद, शास्त्र, ज्योतिष और खगोल जैसे विषयों की शिक्षा दी जाती थी। याचिका में कहा गया है कि यह स्थान सनातन परंपराओं का संरक्षण करने वाला आदर्श गुरुकुल था। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि बाद के मुस्लिम शासकों ने भोजशाला परिसर को क्षति पहुंचाई, लेकिन इसकी धार्मिक पहचान नहीं बदल सकी और हिंदू श्रद्धालु लगातार पूजा करते रहे। वहीं ब्रिटिश काल में इसे “कमाल मौला मस्जिद” के रूप में प्रचारित करने की कोशिश की गई, जिसे याचिका में तथ्यों के विपरीत बताया गया है।

ASI ने दी थी नमाज की अनुमति 

मामले में सबसे बड़ा विवाद वर्ष 2003 के उस आदेश को लेकर है, जिसमें पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) द्वारा शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय को नमाज़ की अनुमति दी गई थी, जबकि हिंदुओं के पूजा अधिकारों पर सीमाएं तय कर दी गईं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 25 में दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। याचिका में अनुच्छेद 29 के तहत सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और अनुच्छेद 49 के तहत ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा की राज्य की जिम्मेदारी का भी हवाला दिया गया है। अब यह मामला धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक पहचान और संवैधानिक अधिकारों की सीधी टक्कर के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर अदालत का फैसला बेहद अहम माना जा रहा है।

हाईकोर्ट का दोबारा रिपोर्ट खोलने से इंकार 

सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन ने कोर्ट को बताया कि ASI की रिपोर्ट पहले ही 4 जुलाई 2024 को पारित आदेश के तहत अनसील कर पक्षकारों को उपलब्ध कराई जा चुकी है। दोनों पक्षों ने भी इस तथ्य से इंकार नहीं किया। बताया गया कि यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में नहीं लाई जा सकी थी। इस स्थिति में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब रिपोर्ट को दोबारा ओपन कोर्ट में अनसील करने की आवश्यकता नहीं है।

रिपोर्ट अपलोड करने के निर्देश

कोर्ट ने रजिस्ट्री कार्यालय को निर्देश दिया है कि ASI रिपोर्ट को ERP पोर्टल पर अपलोड किया जाए। सभी पक्षकारों को 2 सप्ताह का समय दिया जाए, जिससे वो अपनी आपत्तियाँ, राय, सुझाव और सिफारिशें दाखिल कर सकें। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा 22 जनवरी 2026 को पारित आदेश के पैरा 9.9(v) में दिया गया अंतरिम आदेश यथावत प्रभावी रहेगा। 

हाईकोर्ट का आदेश देखें  WA-559-2026

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